श्रद्धा का प्रतीक, सेवा का संकल्प – श्री श्याम धाम सूरत
श्री श्याम धाम, सूरत
भक्ति का दिव्य धाम
जहाँ श्रद्धा मिलती है शांति से, और सेवा से साकार होता है सपनों का धाम।
श्री श्याम मंदिर, सूरत - एक परिचय
श्रद्धा, सेवा और समर्पण से सजे श्याम बाबा के पावन धाम का परिचय
श्री श्याम मंदिर, सूरत, न केवल एक धार्मिक स्थल है बल्कि भक्ति, सेवा और आस्था का जीवंत प्रतीक है। वर्ष 2011 में प्रारंभ हुए इस मंदिर के निर्माण कार्य को 2021 में भक्तों की अटूट श्रद्धा और समर्पण के साथ पूर्ण किया गया। यहां हर दिन हजारों श्रद्धालु प्रभु श्याम के दर्शन करते हैं, बाबा श्याम का गुणगान करते है, और आध्यात्मिक शांति और समृद्धि का अनुभव करते हैं।
यह पावन धाम खाटू श्याम जी व सालासर बालाजी की अखंड ज्योति से प्रकाशित है, जिसे पदयात्रा के माध्यम से सूरत लाया गया। साथ ही त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग से लाई गई ज्योति भी यहाँ प्रज्वलित है। इस मंदिर में नित्य पूजा, सेवा कार्य, रक्तदान शिविर और भागवत कथाएँ एवं सामाजिक व धार्मिक कार्यकर्म किये जाते है | जो समाज और आध्यात्मिक जीवन को एक नई दिशा देते हैं।
वार्षिक दर्शनार्थी
सेवा कार्य प्रति वर्ष
सामाजिक व धार्मिक कार्यकर्म
श्री श्याम मंदिर सूरत – ऐतिहासिक गौरवगाथा

सन 2009 — सूरत की पावन धरती पर भक्ति का एक नया सूर्योदय हुआ। अप्रैल माह में श्याम भक्तों के हृदयों में एक दिव्य संकल्प जागा — “सूरत में भी खाटू श्याम का धाम बनेगा।” तत्कालीन श्याम भक्तो की आस्था और निष्ठा से लिए गए संकल्प और श्री श्याम धाम का सुरत में निर्माण की एक सोच से उसी वर्ष भूमि का चयन किया गया, और 17 अप्रैल 2009 को पूरे वैदिक विधि-विधान से श्री श्याम मंदिर सूरत धाम का भूमि पूजन सम्पन्न हुआ। यह क्षण केवल मिट्टी में ईंट रखने का नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और आस्था की नींव रखने का था।

(श्याम हुंडी)
वर्ष 2010 में मंदिर भूमि को भक्तों के लिए जीवंत बनाने हेतु हर एकादशी को अलग-अलग स्थानों से निशान यात्राओं के आगमन का का शुभारंभ हुआ। इन यात्राओं ने सूरत की गलियारों को भक्ति के रंगों से रंग दिया, और मंदिर के प्रति श्याम भक्ति भावों से ओत प्रोत श्याम भक्तो का आत्मीय लगाव सौपन चढ़ने लगा|

6 मई 2011 — अक्षय तृतीया का शुभ दिन। इस दिन श्री श्याम मंदिर सूरत धाम का शिलान्यास किया गया। साथ ही सालासर बालाजी और भोलेनाथ मंदिर की भी नींव रखी गई। इसी के साथ आरंभ हुआ वह दिव्य निर्माण कार्य, जो सूरत में अध्यात्म और स्थापत्य का एक अद्भुत संगम बनकर उभरा।

वर्ष 2012 में निर्माण कार्य में निरंतर प्रगति हुई, और आठ दिवसीय भक्ति कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को आनंदमय और स्थान भक्तिमय बना दिया।

2013 से 2016 तक यह पवित्र निर्माण कार्य भक्तों की निष्ठा और प्रेम से आगे बढ़ता रहा। हर वर्ष आठ दिवसीय उत्सवों में भक्ति की गूंज सुनाई देती रही। 12 दिसंबर 2016 का दिन सूरत धाम के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गया, जब खाटू श्याम जी से अखंड ज्योत सूरत के लिए रवाना हुई। यह ज्योत सालासर और खाटू धाम से पदयात्रा के माध्यम से लाई गई और 20 जनवरी 2017 को सूरत पहुंची। पूरे नगर ने भक्ति और उत्साह के आलोक में स्नान किया। उसी दिन से 1 फरवरी 2017 तक चला प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव, जो भक्ति, भव्यता और श्रद्धा का अद्वितीय संगम था।

वार्षिक मेले, भजन-संध्या और प्रमुख त्योहारों के आयोजन का पैमाना बढ़ा; स्थानीय व अतिथि कलाकारों को आमंत्रित किया गया।
दान तथा मंदिर-सहयोगी नेटवर्क को संगठित कर बड़े आयोजन सुचारु रूप से संचालित किये गए।

वार्षिक मेले, भजन-संध्या और प्रमुख त्योहारों के आयोजन का पैमाना बढ़ा; स्थानीय व अतिथि कलाकारों को आमंत्रित किया गया।
दान तथा मंदिर-सहयोगी नेटवर्क को संगठित कर बड़े आयोजन सुचारु रूप से संचालित किये गए।

वार्षिक मेले, भजन-संध्या और प्रमुख त्योहारों के आयोजन का पैमाना बढ़ा; स्थानीय व अतिथि कलाकारों को आमंत्रित किया गया।
दान तथा मंदिर-सहयोगी नेटवर्क को संगठित कर बड़े आयोजन सुचारु रूप से संचालित किये गए।

1 फरवरी 2017 — बसंत पंचमी का पावन दिवस — जब तत्कालीन कार्यकारिणी एवं सूरत के श्याम भक्तो की आस्था और मेहनत से श्री श्याम मंदिर सूरत धाम में प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई। बाबा श्याम के मुख्य मंदिर के साथ सालासर हनुमान जी, भोलेनाथ जी, शीतला माता और शनि महाराज के मंदिरों की भी प्रतिष्ठा की गई।
बाएँ बैठे सालासर दरबार, बिच में बिराजे श्याम सरकार, दाए बिराजे शंकर त्रिपुरारी
यह स्वप्न साकार हुआ तत्कालीन कार्यकारिणी और सूरत के श्याम भक्तो के निरंतर प्रयासों से....
वह यात्रा, जिसमें हाथी, घोड़े, बैंड-बाजे, झांकियाँ, और हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा — यह सब मिलकर उस दिन को एक ऐतिहासिक पर्व बना गए। भक्तों की भीड़ इतनी विशाल थी कि यात्रा का एक सिरा मंदिर में था, और दूसरा रिंग रोड पर।

वर्ष 2018 में तत्कालीन कार्यकारिणी के अद्भुत प्रयासों से श्री श्याम मंदिर सूरत धाम ने अपना प्रथम पाटोत्सव मनाया। इस अवसर पर परम पूज्य आचार्य स्वामी श्री श्री अवधेशानंद जी गिरी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा का अमृत वर्षा की। भारत माता मंदिर के संस्थापक श्री श्री सत्यमित्रानंद जी महाराज और मुलुक पीठाधीश्वर श्री श्री राजेंद्रदास जी महाराज की उपस्थिति ने इस आयोजन को और पावन बना दिया। हजारों भक्तों ने कथा का लाभ लिया और साथ ही विशाल रक्तदान शिविर में लगभग एक हज़ार यूनिट रक्तदान किया गया। भक्तों की सेवा भावना और निर्माण कार्य, दोनों ही साथ-साथ आगे बढ़ते रहे। किसी मंदिर में इसे विश्व के महँ संतो के आगमन होता है तो वह स्थान वह मंदिर एक पवित्र स्थान बन जाती है, एस संतो का आगमन ही इस धरा की महानता और श्री श्याम बाबा के प्रति उनकी आस्था का प्रतिक है|

2019 में फागुन मेले का भव्य आयोजन हुआ। मंदिर भक्ति और प्रकाश से आलोकित था। भक्तों व ट्रस्टियों के सहयोग से सभागृह, गोदाम, मुख्य द्वार, कंट्रोल रूम, फ्लोरिंग और कंपाउंड वॉल का कार्य पूरा हुआ। दसदंड कलश को स्वर्ण पालिश कर पुनः प्रतिष्ठित किया गया। श्री श्याम मंदिर सूरत धाम लगभग चालीस हज़ार घनफुट का विशाल चौरिसा संगमरमर से निर्मित है — एक ऐसा अद्भुत मंदिर जिसके गर्भगृह में न सीमेंट है, न स्टील — केवल विश्वास, परंपरा और आस्था का संगम। यह मंदिर प्राचीन शिल्पकला और आधुनिक निर्माण की अद्भुत मिसाल है।

नर सेवा-नारायण सेवा:-
वर्ष 2020— कोरोना का कठिन समय। लेकिन श्री श्याम मंदिर सूरत धाम ने सेवा को धर्म बना लिया। तत्कालीन कार्यकारिणी एवं श्याम भक्तो द्वारा लगातार साठ दिनों तक निरंतर भोजन सेवा के माध्यम से लगभग दस लाख फूड पैकेट्स जरूरतमंदों तक पहुंचाए गए। उसके बाद वैक्सीनेशन शिविरों का आयोजन हुआ, जिनमें पचास हजार से अधिक लोगों को एसएमसी के सहयोग से वैक्सीन दी गई। सेवा का यह भाव मंदिर के निर्माण जितना ही महान था।

25 मार्च 2021 तक मंदिर का सम्पूर्ण निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका था।
कोविड काल में मंदिर ट्रस्ट ने 60 दिनों तक भोजन सेवा द्वारा 20 लाख से अधिक लोगों को भोजन उपलब्ध कराया। साथ ही 50,000 से अधिक लोगों को वैक्सीन देने हेतु शिविर आयोजित हुआ, जिससे सामाजिक सेवा की एक नई मिसाल बनी।

2022 में मंदिर के विस्तार के लिए लगभग बाईस सौ वर्ग गज भूमि ली गई। इस अवसर पर श्री विजय कुशल जी महाराज द्वारा राम कथा का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों भक्तों ने भाग लिया। भूमि का संपूर्ण भुगतान और रजिस्ट्री सम्पन्न की गई तथा भविष्य के कॉरिडोर की योजना और रूपरेखा पर चर्चा हुई।

मंदिर ने 2,200 वर्ग गज नई भूमि का रजिस्ट्रीकरण करवाया। इस शुभ अवसर पर वृंदावन के श्री विजय कौशल जी महाराज द्वारा सात दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों भक्तों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर भक्ति की अनुभूति की।

2024 में श्री गौरव कृष्ण शास्त्री जी द्वारा भव्य भागवत कथा का आयोजन हुआ, और मंदिर के आगे के विस्तार का मार्ग प्रशस्त हुआ।
मंदिर ने 2,200 वर्ग गज नई भूमि का रजिस्ट्रीकरण करवाया। इस शुभ अवसर पर वृंदावन के श्री विजय कौशल जी महाराज द्वारा सात दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों भक्तों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर भक्ति की अनुभूति की।

वर्ष 2025 में तत्कालीन कार्यकारिणी द्वारा सर्वप्रथम मंदिर की सफाई, ट्रस्टियो, सदस्य एवं श्याम भक्तो के दर्शन की व्यवस्था के कार्यो को प्राथमिकता से लेकर उसे प्रारूप देने का कार्य किया गया| digitalization के साथ साथ व्यवस्था पूर्ण रूप से बनी रहे उसका भी विशेष ध्यान दिया गया|
एकादशी के पावन पर्व पर लाखो श्याम भक्तो के दर्शन की उत्तम व्यवस्था, संगीतमय वातावरण, पानी, प्रसाद, नाश्ता की व्यवस्था भी पूर्णरूप से रखी जा रही है|वेबसाईट के माध्यम से श्री श्याम मंदिर सूरत धाम का दुनिया भर में केसे प्रचार हो एवं सभी को बाबा का आशीर्वाद मिल सके उसकी उत्तम व्यवस्था की गई|
श्री श्याम बाबा का गौरवगाथा
कलियुग के देवता, जिनका शीश कभी झुका नहीं
महाभारत के महान योद्धा बर्बरीक, युद्ध में केवल हारने वाले पक्ष की ओर से लड़ने के वचन के कारण भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे उनका शीश माँगा। बर्बरीक ने बिना संकोच अपने शीश का बलिदान दे दिया।भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे उन्ही के रूप में “श्याम बाबा” नाम से पूजे जाएंगे। आज खाटूधाम में स्थित मंदिर में उनका शीश विराजित है, जहाँ लाखों भक्त उनकी आराधना में लीन होकर मनोकामना करते हैं। श्याम बाबा आज भी भक्तों की करुण पुकार सुनते हैं।
श्री श्याम बाबा को कलियुग के जीवंत देवता व हारे का सहारा माना जाता है, जिनकी आराधना से हर समस्या का समाधान संभव है। उनकी कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है। भक्त मानते हैं कि एक बार सच्चे मन से “जय श्री श्याम” पुकारने पर बाबा उनके दुख हर लेते हैं। खाटू श्यामजी के मंदिर में फागुन की शुक्ल पक्ष एकादशी को फाल्गुन मेले में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं।
श्याम धाम से जुड़ें – दर्शन, सेवा और भक्ति का अनुभव
भजन संग्रह
भक्ति में रमा एक संगीतमय यात्रा
श्री श्याम बाबा के भजनों का यह संग्रह भक्तों को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। इनमें बाबा की महिमा, लीला और भक्तों की श्रद्धा को संगीतमय रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह भजन संग्रह न केवल मन को शांत करता है, बल्कि भक्तों को बाबा से आत्मिक रूप से जोड़ने का माध्यम भी बनता है। चाहे मंदिर में हो या घर पर, ये भजन हर जगह बाबा की उपस्थिति का अनुभव कराते हैं।
लाइव दर्शन
अब घर बैठे भी करें श्याम बाबा के दर्शन।
भक्तों की सुविधा के लिए श्री श्याम मंदिर, सूरत से प्रतिदिन आरती और पूजा-पाठ का सीधा प्रसारण किया जाता है। घर बैठे ही बाबा के दिव्य दर्शन करें और भक्तिभाव से जुड़ें।
प्रातः आरती
सुबह 5:15 बजे
संध्या आरती
शाम 7:00 बजे
विशेष पूजा
हर एकादशी एवं पूर्णिमा को
आरती का समय और विधि
भक्ति से भरी आरतियाँ — श्याम बाबा के चरणों का नित्य साकार अनुभव।
श्री श्याम मंदिर में प्रतिदिन होने वाली आरतियाँ भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुष्ठान और भक्ति का मुख्य केंद्र हैं। नीचे पट खुलने , मंगल होने एवं आरतियों का समय दिया गया है।
सुबह की आरती (उषा आरती)
समय: सुबह 6:00 बजे
अवधि: 10–15 मिनट
विधि: हल्दी/कुमकुम का तिलक, दीप प्रज्वलन, संक्षिप्त मंत्र, आरती गीत
दोपहर की आरती (मध्याह्न आरती)
समय: दोपहर 12:00 बजे
अवधि: 5–10 मिनट
विधि: सरल भजन, प्रसाद अर्पण
शाम की आरती (सांझ आरती / दीप आरती)
समय: शाम 7:30 बजे
अवधि: 20–25 मिनट
विधि: बड़े भजन-संग्रह, नृत्यात्मक आरती (यदि हो), प्रसाद वितरण
विशेष पूजा / त्यौहार आरती
समय: त्यौहार/विशेष अवसरों पर कार्यक्रम अनुसार (पूर्व सूचना दी जाएगी)
विधि: विशेष मंत्रोच्चार, आरती-यज्ञ, माला-पूजन, प्रसाद वितरण
गैलरी – भक्ति और स्मृतियों की झलक
आगामी आयोजन
श्याम बाबा जन्मोत्सव
स्थान: श्री श्याम मंदिर प्रांगण, सूरत
दिनांक: 01 नवम्बर 2025
श्याम बाबा पाटोत्सव
स्थान:श्री श्याम मंदिर, सूरत
दिनांक: 23 जनवरी 2026
फाल्गुन मेला
स्थान:श्री श्याम मंदिर, सूरत
दिनांक: 26, 27, 28 फरवरी 2026
पावन सेवा में भागी बनें
आपका छोटा सा योगदान मंदिर की दिव्य सेवाओं को और भी भव्य बना सकता है।
श्री श्याम मंदिर, सूरत में दान करना अब सरल और सुरक्षित है। आपका दान मंदिर विकास और धार्मिक सेवा कार्यों में उपयोग होता है, जिससे आप पुण्य के भागीदार बनते हैं।
जन्मदिन
ट्रस्ट के ट्रस्टी और सदयस्यों का जन्मदिन
प्रतिदिन भोग दर्शन
हर दिन प्रातः 11:30 बजे श्री श्याम जी को विशेष भोग अर्पण
दर्शन के लिए मंदिर पधारें या ऑनलाइन जुड़ें
भोग दर्शन से आत्मिक शांति और पुण्य लाभ प्राप्त करें।





































